नए साल में अच्छे कर्म करने का संकल्प ही बनेगा उज्ज्वल भविष्य सत्येंनन्द राय
सोनभद्र पिपरी नववर्ष का आगमन आत्मचिंतन और संकल्प का अवसर लेकर आता है। वर्ष 2025 किसी के लिए खुशियां लाया तो किसी के लिए चुनौतियां। किसी को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया तो किसी को संघर्ष की राह पर खड़ा कर दिया। लेकिन जीवन का सत्य यही है कि यह संसार कर्मभूमि है—जैसा कर्म, वैसा फल।
अब 2025 के बीते पलों पर विचार करने के बजाय 2026 को बेहतर बनाने का संकल्प लेने का समय है। नए साल में हम सबको अपनी सामर्थ्य के अनुसार अच्छे कर्मों की शुरुआत करनी चाहिए। जरूरतमंदों को कंबल, स्वेटर या भोजन उपलब्ध कराना, सड़कों पर घूमने वाली गायों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करना, असहाय व्यक्तियों को आश्रय देना—ऐसे छोटे-छोटे प्रयास भी जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
कहा जाता है कि मनुष्य के साथ अंततः उसका कर्म ही जाता है। कुकर्मों का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करता है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियां संस्कारवान और सुयोग्य बनें, तो आज से ही सत्कर्मों का मार्ग अपनाना होगा
अर्थात् मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता किए बिना निरंतर कर्म करते रहना चाहिए।
आइए, हम सभी मिलकर 2026 में अच्छे कर्म करने की शपथ लें और आपसी सद्भाव, भाईचारे व मानवीय मूल्यों की खुशबू से देश और समाज को सुगंधित





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