हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है” -सुभाष जी (क्षेत्र प्रचार प्रमुख,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र)

हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है” -सुभाष जी (क्षेत्र प्रचार प्रमुख,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र)

सोनभद्र:सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलन आज अत्यधिक सुदूर वनवासी क्षेत्र ग्राम कनहरा के शिव मंदिर प्रांगण में माननीय सुभाष जी (क्षेत्र प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) के मुख्यातिथ्य में सम्पन्न हुआ।मुख्य अतिथि/मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदू धर्म मानवता का धर्म है।हम सभी हिंदू हैं।क्योंकि हमारे सभी पुरखे हिंदू थे इसलिए हम हिंदू हैं, हमारी संस्कृति हिंदू है इसलिए हम हिंदू है।

 

मनुष्य मनुष्यत्व पर जो हिंदुत्व है वही राष्ट्रीयत्व है वही भारतीयत्व है और वही मनुष्यत्व है। ये जो मनुष्य है यही हिंदुत्व है और इसलिए हमारे यहां कहा है कि हिंदुत्व एक जीवन दृष्टि है। हिंदुत्व का एक रूप विनम्रता का भी है और हिंदुत्व का एक रूप विशालता का भी देखने को मिलता है। विनम्रता क्या है विनम्रता यह है कि हम सीटी के अंदर भी भगवान का दर्शन करते हैं? सर्वत्र ईश्वर का दर्शन करते हैं जो कुछ हमारे आंखों के सामने है वह परमात्मा के रूप में हम देखते हैं। कबीरदास जी कहते हैं केवल काशी में ही भगवान नहीं है सब जगह भगवान है।

 

इस प्रकार की मान्यता किसकी है हिंदुत्व की है इस प्रकार की मान्यता कौन रखता है हिंदू रखता है और इसलिए हमारे देश के अंदर हमने धरती को भी माता माना है। धरती को भी हमने माता का स्थान दिया है। हमारे देश के एक प्रसिद्ध कवि थे। भारत के प्रधानमंत्री भी बने जिनका नाम अटल बिहारी वाजपेयी था वे कहते थे यह जो धरती है। यह केवल ईट पत्थर का ढेर नहीं है। यह हमारे लिए क्या है वे कहते थे “भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह जीता जागता राष्ट्रपुरुष है ।

ये वंदन की धरती है, ये अभिनन्दन की भूमि है ।
ये अर्पण की भूमि है ये तर्पण की भूमि है।
इसकी नदी-नदी हमारे लिए गंगा है, इसका कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है।हम जिएंगे तो इस भारत के लिए और मरेंगे तो इस भारत के लिए,और मरने के बाद भी गंगाजल में बहती हुई हमारी अस्थियों को कोई कान लगाकर सुनेगा, तो एक ही आवाज आएगी भारत माता की जय।भारत हिन्दुस्तान है, हिंदू भूमि है, पुण्य भूमि है, धर्म भूमि है,आर्यभूमि है यहाँ हम पैदा हुए हैं इसके नाते से हमारी पहचान है और इसलिए हम हिंदू हैं।

 

एक बड़ा परिवार है हमारा पुरखे सबके हिंदू है विराट सागर समाज अपना हम सब के पुरखे सबके हिंदू है हमने विनम्रता भी सीखा है और हमारे पुरखों ने हमको विशाल हृदय भी दिया है विशालता भी सिखाया है। वसुंधरा परिवार हमारा यह विश्व एक परिवार है। दुनिया में अगर कोई विश्व को परिवार मानता है तो वो केवल और केवल हिंदू ही है जो कहते हैं कि विश्व हमारा परिवार है हम इतना विशाल चिंतन रखते हैं। हम कितना विशाल दृष्टिकोण रखते हैं विवेकानंद जी ने भारत लौट करके कहा था अमेरिका के वासियों को संबोधित करते अमेरिका के अंदर भी कहा था मैं उस देश से आया हूं जिस देश के लोगों ने दुनिया के सताए हुए लोगों को शरण देने का काम किया है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नरसिंह त्रिपाठी ने कहा परिवार के अंदर हम मंगल संवाद करें। छोटे बच्चों को स्नेह दे बड़ों को सम्मान दें। नारी का सम्मान करें। महिलाओं का सम्मान करें। मातृ शक्ति का सम्मान करिए नारी माता लक्ष्मी के रूप में है नारी सरस्वती के रूप में है नारी दुर्गा के रूप में है और संकट पढ़ने पर सामने संकट दिखने पर राणी नारी चंडी के रूप में भी प्रकट हो जाती है और इसलिए नारी से नर होता है ध्रुव प्रहलाद समान नारी निंदा न करो नारी की निंदा करने की आवश्यकता नहीं है। नारी नर की खान है नर से नरोत्तम बनाने का काम जीजा माता बाल शिवा को शिवाजी बना करके दुश्मनों को धूल चटाने का काम करती है। नारी अपने पति के प्राणों को लाने के लिए यमराज से भी लड़ाई लड़ जाती है। नारी की ताकत है उसकी ताकत को हम पहचानें और उसका सम्मान करें परिवार को मजबूत करें।

 

हमारे परिवार मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये शंभू ने आशीर्वचन में कहा की हम सबको एक होकर रहना होगा इसलिए जाति पाति की करो बिदाई हम सब हैं भाई भाई।कार्यक्रम में विभाग संयोजक धन्यजय पाठक,हिन्दू सम्मेलन सोनभद्र जिला संयोजक आलोक कुमार चतुर्वेदी, अनिल तिवारी,ओमप्रकाश, गणेश तिवारी, बिनोद बंटी,प्रसाधी लाल मुखिया,शिवनाथ, उमेश सिंह, संतोष शुक्ला,रामलखन गुप्ता,छोटेलाल खरवार,

सौरभ,रामजी,जगनरायण,रामकुमार,मोहन, बाल्मीकि,अर्जिलाल,रामेश्वर पनिका,कुमारी कल्पना प्रजापति,बिनोद,तेजप्रताप,तिलक पनिका,रामदयाल गोंड,संजय गुर्जर कार्यक्रम का सफल संचालन सह संयोजक जनार्दन प्रसाद ने किया।

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