ओबरा में पुलिस की नाकामी, कोर्ट के आदेश पर ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश
सोनभद्र। ओबरा तापीय परियोजना में कार्य समाप्ति के बाद सामान ले जा रहे ट्रक चालकों के साथ मारपीट, सामान क्षतिग्रस्त करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस की निष्क्रियता के बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी राहुल की अदालत ने ओबरा थानाध्यक्ष को पांच नामजद ठेकेदारों काशीनाथ प्रसाद, आरपी तिवारी, राजू पांडेय, महफूज अहमद और राजू यादव तथा 10-12 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विधि अनुरूप जांच करने का आदेश दिया है।
मामला इंडवेल कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. के साइट इंचार्ज वीरा वेंकटा ज्ञानेश्वर का है, जिन्होंने अधिवक्ता पवन कुमार मिश्र के माध्यम से धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। ज्ञानेश्वर ने बताया कि ओबरा थर्मल पावर प्लांट सी में दुशान पावर सिस्टम इंडिया प्रा. लि. के लिए संविदा पर कार्य पूरा होने के बाद, 30 जुलाई 2025 को गेट पास और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर वे अपना सामान ट्रकों से ले जा रहे थे। लेकिन उक्त ठेकेदारों और अन्य लोगों ने ट्रक चालकों के साथ मारपीट की, ट्रकों की चाभी छीन ली, टायरों की हवा निकाल दी, सामान को नुकसान पहुंचाया और जान से मारने की धमकी दी। इसकी शिकायत ओबरा थाने, 112 पुलिस और एसपी सोनभद्र से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट ने अधिवक्ता के तर्कों और पत्रावली के अवलोकन के बाद मामले को संज्ञेय अपराध मानते हुए ओबरा थानाध्यक्ष को सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया। यह मामला पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, जहां पीड़ित को न्याय के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।





