विश्व का मूल प्राणवायु है हिंदू संस्कृति व सनातन धर्म- जगदीश पंथी (साहित्यकार)
सोनभद्र: सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन विकासखंड चतरा के नरोखर न्याय पंचायत का शिव मंदिर नई बाजार के प्रांगण में,विकासखंड करमा के पुरखास न्याय पंचायत का जन सेवा स्कूल इमलीपुर के प्रांगण में जगदीश पंथी वरिष्ठ साहित्यकार तथा अवध नारायण के मुख्यातिथ्य में संपन्न हुआ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश पंथी ने कहा कि हिंदू संस्कृति “अनादि अनंत काल की” है, जिसका अर्थ है कि यह न केवल अत्यधिक प्राचीन है, बल्कि कालातीत और शाश्वत भी है। यह अवधारणा हिंदू धर्म के मूल दर्शन और मान्यताओं में गहराई से निहित है,हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ, विशेष रूप से वेद विश्व की सबसे पुरानी जीवित साहित्यिक परंपराओं में से हैं। इन्हें मौखिक रूप से हजारों वर्षों तक संरक्षित किया गया और फिर लिखा गया, जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण है हिंदू दर्शन जैसे उपनिषद और भगवद गीता जीवन के मौलिक प्रश्नों जैसे आत्मा, कर्म और मोक्ष से संबंधित हैं, जो सार्वभौमिक और शाश्वत हैं।
अगर आप हिंदू हो तो आपकी निष्ठा भारत के साथ और भारतीय संस्कारों से अनादि अनंत काल से बनी है। अगर आपका धर्म भारत का मूल धर्म नहीं है तो आप देश के साथ एकात्मता का संबंध नहीं बना सकते।हिंदू धर्म रैखिक समय में विश्वास नहीं करता है, बल्कि चक्रीय समय में विश्वास करता है। ब्रह्मांड का निर्माण, संरक्षण और विघटन लगातार होता रहता है। इस दर्शन के अनुसार, संस्कृति भी इस अनंत चक्र का एक हिस्सा है, जिसका न कोई निश्चित प्रारंभ है और न ही अंत।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सत्य प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदू धर्म केवल एक धर्म नहीं है, बल्कि एक जीवन शैली है, जो दैनिक जीवन, नैतिकता और कर्तव्यों को समाहित करता है। इसके लचीलापन और अनुकूलनशीलता ने इसे युगों तक जीवित रहने में मदद की है। कार्यक्रम में जिला संयोजक आलोक कुमार चतुर्वेदी,अशोक गोस्वामी,सूर्य प्रकाश पाण्डेय, नागेंद्र पाठक,सतेन्द्र त्रिपाठी,नन्दलाल विश्वकर्मा, लालू यादव, जयशंकर शुक्ला,शिवम,चन्द्र भूषण तिवारी,दया शंकर तिवारी,अजय पाण्डेय,सुभाष पाठक,जितेंद्र सिंह,जय शंकर जी,नरेन्द्र,डॉ सूर्य प्रकाश पाण्डेय,भोला,विनोद,मनोहर नन्दलाल, विनोद,बबलू सोनी,चंद्रकांत,मुन्ना,अमरेश तिवारी,कमलेश,शिवम्,विनोद तिवारी,दूधनाथ तिवारी,सुशील आदि लोग उपस्थित रहे।





