नगर पंचायत पिपरी में कोटेदार जांच पर उठे सवाल, कार्यालय में दर्ज हुए बयान – नियमों की अनदेखी
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लाभार्थियों के पूर्वलिखित बयान, शिकायतकर्ता को बाद में बुलाया गया – अधिकांश उपभोक्ता खुद कोटेदार लेकर आया
पिपरी / सोनभद्र।
नगर पंचायत पिपरी के राशन विक्रेता (कोटेदार) सुवंश ठाकुर के विरुद्ध की गई शिकायत के बाद गठित जांच टीम की कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शासनादेश के अनुसार जांच अधिकारी को लाभार्थियों के घर-घर जाकर स्वतंत्र रूप से बयान लेने होते हैं, लेकिन इसके विपरीत नगर पंचायत कार्यालय में बैठकर सामूहिक बयान दर्ज किए गए। इस पूरी प्रक्रिया की पुष्टि नगर पंचायत कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी से भी की जा सकती है।

कार्डधारकों के अनुसार, लगभग 80 से 90 प्रतिशत लाभार्थियों को स्वयं कोटेदार अपने साथ कार्यालय लेकर आया, जबकि किसी भी जांच में आरोपित व्यक्ति की मौजूदगी में लिया गया बयान मान्य नहीं होता। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता को भी तब बुलाया गया जब अधिकांश बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके थे, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल और गहरा गया है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि “जांच अधिकारी ने कोटेदार की मौजूदगी में, उसी के द्वारा लाए गए व्यक्तियों से बयान लेकर केवल औपचारिकता पूरी कर दी, जबकि वास्तविक सत्यापन नियमानुसार घर-घर जाकर होना चाहिए था।”
क्या कहता है नियम?
(खाद्य एवं रसद विभाग, उत्तर प्रदेश – पूर्ति निरीक्षण व कोटेदार जांच प्रावधान अनुसार)
1- बयान कार्डधारकों के घर-घर जाकर लिए जाएँ, कार्यालय में नहीं।
2- जांच के दौरान कोटेदार की उपस्थिति या दबाव में लिया गया बयान अमान्य माना जाता है।
3- कार्डधारकों का चयन जांच अधिकारी द्वारा किया जाता है, न कि कोटेदार द्वारा लाए गए व्यक्तियों से बयान लिया जाता है।
4- शिकायतकर्ता को शुरुआत से जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाना अनिवार्य है।
कहाँ टूटा नियम? (तथ्य बनाम नियम तुलना)
जांच नियम वास्तविक स्थिति परिणाम
लाभार्थियों से घर-घर जाकर बयान नगर पंचायत कार्यालय में सामूहिक बयान जांच प्रक्रिया संदिग्ध
लाभार्थी चयन अधिकारी द्वारा लाभार्थी स्वयं कोटेदार लेकर आया बयान प्रभावित
शिकायतकर्ता की उपस्थिति ज़रूरी शिकायतकर्ता को बाद में बुलाया गया पक्षपात की आशंका
स्वतंत्र व निष्पक्ष बयान आवश्यक कोटेदार पूरी जांच के दौरान मौजूद जांच अवैध/अमान्य
स्थानीय मांग
स्थानीय नागरिक व शिकायतकर्ता ने कहा है कि “कोटेदार के प्रभाव में दिए गए सभी बयानों को निरस्त कर, घर-घर जाकर पुनः जांच कराई जाए।”
लोगों ने जिला पूर्ति अधिकारी से कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।





