किताबों की सैर, सपनों की उड़ान: सोनभद्र में ‘उपक्रम’ ने बुन दी नई पहचान
सोनभद्र। खनन और पहाड़ों की गोद में बसा सोनभद्र अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। उपक्रम एजुकेशनल फाउंडेशन की सह-संस्थापक किरण तिवारी की अगुवाई में शुरू हुई ‘झोला लाइब्रेरी’ और स्कूली कार्यक्रमों ने ग्रामीण बच्चों के दिलों में ज्ञान की चिंगारी जलाई है। यह पहल न केवल शिक्षा का दीप जला रही है, बल्कि सामाजिक बदलाव की मशाल बनकर बच्चों के सपनों को पंख दे रही है।
झोला लाइब्रेरी: किताबों का कारवां, उम्मीदों का सफर-
2021 में एक साधारण झोले और मुट्ठी भर किताबों से शुरू हुई ‘झोला लाइब्रेरी’ आज सोनभद्र की बस्तियों में बच्चों के लिए उम्मीद का आलम बन चुकी है। डाला क्षेत्र की तंग गलियों से निकला यह अभियान अब एक सामुदायिक आंदोलन का रूप ले चुका है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस मुहिम में दिल से जुड़े हैं। हर महीने होने वाले सामुदायिक पठन सत्रों में रीड-अलाउड, कहानी पाठ, विज्ञान प्रयोग और कविता लेखन जैसे कार्यक्रम बच्चों में पढ़ने का जुनून और आत्मविश्वास जगा रहे हैं। इस पहल ने 500 से अधिक बच्चों को स्कूल की राह दिखाई है। कई बच्चे अब अपनी कहानियां लिख रहे हैं, चित्रकारी कर रहे हैं और अपने सपनों को शब्दों में उकेर रहे हैं। किरण तिवारी कहती हैं, “यह झोला सिर्फ किताबों का नहीं, बल्कि उन बच्चों के सपनों का प्रतीक है, जो कभी स्कूल से दूर थे।”
स्कूलों में नवाचार: पढ़ने की घंटी और अभिव्यक्ति-
उपक्रम एजुकेशनल फाउंडेशन सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर ‘पढ़ने की घंटी’ और ‘अभिव्यक्ति’ जैसे क्रांतिकारी कार्यक्रम चला रहा है। ‘पढ़ने की घंटी’ के तहत स्कूलों में जीवंत लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, जहां बच्चे स्वयं लाइब्रेरी की बागडोर संभालते हैं। वहीं, ‘अभिव्यक्ति’ कार्यक्रम कहानियों, भाषा और भावनात्मक शिक्षा के जरिए बच्चों में रचनात्मक सोच, संवेदना और पठन-समझ को पंख देता है। इन प्रयासों से बच्चों की स्कूल उपस्थिति बढ़ी है और उनके पढ़ने-लिखने का स्तर उछाल ले रहा है। कहानी-आधारित शिक्षण विधियों ने बच्चों को न केवल पढ़ना सिखाया, बल्कि सवाल पूछने और सोचने की आजादी भी दी।
सामाजिक बदलाव का नया दौर-
सोनभद्र जैसे खनन प्रभावित क्षेत्र में, जहां शिक्षा एक चुनौती है, उपक्रम ने साबित किया है कि कहानियां सपनों को सच करने का रास्ता बन सकती हैं। इस पहल ने लड़कियों को नई उड़ान दी, परिवारों में संवाद की लौ जलाई और गांवों में सकारात्मक माहौल रचा। हाल ही में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर संस्था के ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह की शुरुआत की, जो स्थानीय प्रयासों के नीतिगत प्रभाव को दर्शाता है।
भविष्य की राह-
उपक्रम अब हर ब्लॉक में सामुदायिक लाइब्रेरी केंद्र और मॉडल स्कूल लाइब्रेरी स्थापित करने का सपना देख रहा है। किरण तिवारी का कहना है, “अगर हर बच्चा कहानी सुन और पढ़ सके, तो वह अपने जीवन का नायक बन सकता है। किताबें सिर्फ ज्ञान नहीं, सपनों की उड़ान देती हैं।” यह पहल सोनभद्र को शिक्षा के नए शिखर पर ले जाने को बेताब है।





