“गुरु-प्राकट्य महोत्सव पर प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम”
[परम पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज के जन्मोत्सव पर गुप्तकाशी विकास परिषद ने किया बृहद् वृक्षारोपण]सोनभद्र (नि.सं.)।”आचार्यदेवो भव।” भारतीय संस्कृति का यह अमर वाक्य आषाढ़ कृष्ण द्वादशी के पावन दिवस पर साकार होता दिखाई दिया, जब सिद्धपीठ श्री हनुमन्निवास, अयोध्या धाम के परम पूज्य संत, वेद-वेदान्त के प्रकाण्ड विद्वान, सनातन संस्कृति के प्रखर प्रवक्ता एवं युगद्रष्टा पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज का पावन प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और अनुपम उत्साह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर गुप्तकाशी विकास परिषद द्वारा ईश्वर प्रसाद महाविद्यालय, हिन्दुवारी के विशाल परिसर में बृहद् वृक्षारोपण किया गया। यह आयोजन केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय ऋषि परंपरा, गुरु-भक्ति, प्रकृति संरक्षण और लोकमंगल के महान संकल्प का सजीव उत्सव बन गया।
परिषद के संरक्षक मंडल सदस्य एवं राष्ट्रीय साहित्यकार पारस नाथ मिश्र ने कहा कि पूज्य गुरुदेव ज्ञान, तप, भक्ति, करुणा, शील और धर्म के साक्षात् प्रकाश-स्तंभ हैं। उनके प्राकट्य दिवस पर लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाले समय में मानवता के लिए शीतल छाया, प्राणवायु और जीवन का संदेश देगा।
उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन स्वयं एक कल्पवृक्ष के समान है, जिसकी छाया में समाज को धर्म, संस्कार और आत्मबोध का अमृत प्राप्त होता है। श्री मिश्र ने यह भी कहा कि जी स्वर्ग की कल्पना हम करते हैं उसे स्वर्ग में कल्पवृक्ष और कामधेनु ही महत्वपूर्ण है ऐसी स्थिति में इस धरती पर ही कल्पवृक्ष व कामधेनु प्राप्त कर स्वर्ग की अनुभूति कर सकते हैं
भोजपुरी के राष्ट्रीय कवि जगदीश पंथी ने कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद समाज को सदैव धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा।
संरक्षक मंडल सदस्य बृजेश कुमार शुक्ला ने वैदिक स्वस्तिवाचन के साथ देवाधिदेव से प्रार्थना की कि पूज्य गुरुदेव निरंतर स्वस्थ, यशस्वी एवं दीर्घायु रहें तथा उनका दिव्य मार्गदर्शन युगों तक राष्ट्र और समाज को आलोकित करता रहे।
महाविद्यालय के प्रबंधक मनीष पाण्डेय ने कहा कि सोनभद्र का यह परम सौभाग्य है कि पूज्य महाराज श्री का पावन सान्निध्य इस जनपद को अनेक बार प्राप्त हुआ। उनके आध्यात्मिक संदेशों ने ग्रामीण समाज में नैतिकता, संस्कार और राष्ट्रचेतना का नया प्रकाश फैलाया।
संरक्षक मंडल सदस्य व साहित्यकार अजय चतुर्वेदी कक्का ने कहा कि गुरुदेव की स्मृति में लगाए गए ये वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध होंगे।
गुप्त काशी विकास परिषद के अध्यक्ष पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी ने किया कार्यक्रम ने कहा कि ऐसे संतों का अवतरण किसी एक क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के आध्यात्मिक उत्थान के लिए होता है।
परिषद के वरिष्ठ सचिव एवं सोनभद्र बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष सुरेश पाठक ने घोषणा की कि परिषद गुरुदेव के संरक्षण एवं प्रेरणा से जनपदभर में पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण, वृक्षारोपण तथा भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का व्यापक अभियान चलाएगी।
भाजपा पूर्व मीडिया प्रभारी अनूप तिवारी व प्रधान संघ सुरेश शुक्ल द्वय ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए गुरुदेव केवल आध्यात्मिक आचार्य नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण के प्रेरणास्रोत हैं। उनके आदर्श युवाओं में चरित्र, सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का संचार करते रहेंगे।
समारोह का समापन वैदिक मंगलकामना, गुरु-वंदना और “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक वर्ष गुरुदेव के प्राकट्य महोत्सव पर वृक्षारोपण कर प्रकृति और संस्कृति दोनों की सेवा करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक हेमनाथ पाण्डेय व कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ पत्रकार भोलानाथ मिश्र तथा प्रस्तावना प्राचार्य बिमलेश त्रिपाठी ने किया कार्यक्रम के आयोजक विद्यालय प्रबंधक मनीष पांडे रहे। कार्यक्रम में प्रकाश त्रिपाठी,पारस नाथ मिश्र,अनूप तिवारी,सुरेश शुक्ल,सुरेश पाठक,आलोक कुमार चतुर्वेदी,अजय चतुर्वेदी कक्का,मनीष पाण्डेय,बृजेश कुमार शुक्ला,जगदीश पंथी,हेमनाथ पाण्डेय,डॉ विमलेश कुमार तिवारी , राजेश कुमार द्विवेदी,मृत्युंजय पाठक,विमलेश कुमार पाठक,श्रीमती गीता मौर्य,विनय प्रजापति,बृजेश सिंह पटेल,विनीत पाण्डेय,भोलानाथ मिश्र,श्रीमती सरिता जी उपस्थित रहे।






