वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण, विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण, विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

– महिला कल्याण विभाग व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त पहल

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र के आदेश पर सोमवार को महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शैलेन्द्र यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान मिली व्यवस्थाएँ संतोषजनक-
निरीक्षण के दौरान वन स्टॉप सेंटर की केन्द्र प्रबन्धक दीपिका सिंह सहित समस्त स्टाफ मौके पर मौजूद रहा। सेंटर की साफ-सफाई तथा खान-पान की व्यवस्थाएँ संतोषजनक पाई गईं। श्री यादव ने विशेष रूप से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर ध्यान देने के निर्देश दिए। वर्तमान समय में केंद्र पर 1 माह 4 दिन के बालक सूर्यांश, 5 दिन की बालिका कात्यायनी, 5 वर्षीय बालक आर्यन एवं 9 वर्षीय बालिका आंचल सहित कुल 228 प्रकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 में दर्ज हैं।

कानूनों की दी गई जानकारी-
शिविर के दौरान सेंटर के स्टाफ को विभिन्न महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों की जानकारी दी गई, जिनमें शामिल हैं:
नैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1954, घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971, मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 (26 सप्ताह तक), कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (निवारण) अधिनियम 2013, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012, गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994, समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976, महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम 1966, हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956

जागरूकता फैलाने के निर्देश-
अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव ने निर्देश दिए कि वन स्टॉप सेंटर की टीम जिला स्तरीय एवं ब्लॉक स्तरीय विभिन्न स्थलों पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन कर इन सभी कानूनों की जानकारी आमजन तक पहुँचाए और की गई कार्यवाहियों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत कराए।

अधिकारी का वक्तव्य-
शैलेन्द्र यादव ने कहा कि “वन स्टॉप सेंटर न सिर्फ पीड़ित महिलाओं और बच्चों के संरक्षण का स्थान है, बल्कि यहाँ से समाज में विधिक जागरूकता फैलाना भी उतना ही आवश्यक है। सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य में सक्रियता से योगदान दें।”

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