पिपरी रेंजर राघवेंद्र कुमार की सख्ती से थमे वन अपराध, तीन वर्षों में 19 लाख 30 हजार रुपये का राजस्व जमा

पिपरी रेंजर राघवेंद्र कुमार की सख्ती से थमे वन अपराध, तीन वर्षों में 19 लाख 30 हजार रुपये का राजस्व जमा

 

रेणुकूट (सोनभद्र): रेणुकूट वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाली पिपरी वन रेंज में तैनात रेंजर राघवेंद्र कुमार ने बीते लगभग तीन वर्षों में वन अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियानों के परिणामस्वरूप वन अपराधों से वसूले गए जुर्माने के रूप में अब तक 19,30,500 रुपये का राजस्व विभाग में जमा कराया गया है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह राशि जिले की विभिन्न वन रेंजों में वसूले गए जुर्मानों में सबसे अधिक बताई जा रही है। रेंजर राघवेंद्र कुमार द्वारा क्षेत्र में सक्रिय वन माफियाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में उन्होंने खैर की लकड़ी से लदे दो ट्रकों को जब्त किया तथा चार अंतरराज्यीय खैर तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सक्रिय वन माफियाओं में हड़कंप मच गया और अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेंजर की सख्ती के कारण वन माफियाओं की मनमानी पर रोक लगी है। हालांकि कुछ लोग उनकी कार्रवाई से नाराज होकर उनके खिलाफ गलत आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि रेंजर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए वन संपदा की सुरक्षा के लिए नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं।

वन संरक्षण के साथ-साथ राघवेंद्र कुमार सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। वे समय-समय पर अपने वन क्षेत्र के आदिवासी और जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच आवश्यक सामग्री का वितरण करते हैं। इसके अलावा विभाग के निचले वर्ग के कर्मचारियों को जाड़े के मौसम में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शाल, कंबल और कोट वितरित कर सहयोग किया।
इसी क्रम में मुर्धवा के पास नेशनल हाईवे किनारे करोड़ों रुपये मूल्य की लगभग 10 बीघा वन भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराकर ‘काकोरी वन’ विकसित कराया गया है। साथ ही उनके प्रयासों से नगरवासियों के लिए करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘नगर वन’ की शुरुआत भी की गई है।

कुछ लोगों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा कराने का आरोप भी लगाया गया था, जिसे विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जानकारों ने निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह कार्य वन विभाग की नगर वन योजना के तहत कराया गया है और कुछ लोग गलत जानकारी देकर अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिपरी रेंजर की सख्ती से वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगी है और वन संपदा की सुरक्षा पहले से बेहतर हुई है।

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